Wednesday, 30 August 2017

विषय-आत्‍मबोधन परीक्षण (T.A.T.) तथा बाल-अन्‍तर्बोध परीक्षण (C.A.T)

विषय-आत्‍मबोधन परीक्षण (T.A.T.) तथा बाल-अन्‍तर्बोध परीक्षण (C.A.T)
विषय-आत्‍मबोधन परीक्षण [Thematic Apperception Test (T.A.T.)]
                इस परीक्षण का निर्माण मर्रे ने सन् 1935 में हारवार्ड विश्‍वविद्यालय, अमेरिका में किया। सन् 1938 में मार्गन के साथ मिलकर इस परीक्षण का संशोधन किया।
· इस परीक्षण को प्रासंगिक अन्तर्बोध परीक्षण तथा कथा प्रसंग परीक्षण भी कहते है।
·  इस परीक्षण में कुल कार्ड = 30 (इनके अलावा एक खाली कार्ड)
· चित्रों से सम्बन्धित कुल कार्ड = 30 (जीवन की विभिन्न परिस्थितियों को दिखाने वाले कार्ड)
·  खाली कार्ड की संख्या=1 (इस पर कहानी लिखने के लिए कहा जाता है)
·  इस परीक्षण में जीवन की विभिन्न स्थितियों को दिखाने वाले कार्डों पर चित्र दिखाये गये।
·  इस परीक्षण के अन्तर्गत 10 कार्डों पर पुरुषों से सम्बन्धित चित्र एवं 10 कार्डो पर स्त्रियों से सम्बन्धित चित्र तथा अन्य 10 पर दोनों से सम्बन्धित चित्र बने होते है।
· यह परीक्षण व्यक्तिगत व सामुहिक दोनों रूपों में प्रयोग किया जा सकता है।
·  यह परीक्षण 14 वर्ष से अधिक आयु वालें बालक-बालिकाओं के लिए विशेष उपयोगी होता है।
·  इसमें व्यक्ति को चित्र दिखाया जाता है, उसके उपरान्त कहानी लिखने को कहा जाता है।
·  इस विधि में बालक-बालिकाओं को विभिन्न कार्ड दिखाकर कहानी, या कथानंक लिखने को कहा जाता है।
·   कार्ड पर अस्पष्ट चित्र बने होते हैं।
·   इस परीक्षण के अन्तर्गत व्यक्ति अपनी खुद की आवश्यकताओं, उद्देश्यों, भावनाओं, कठिनाईयों, समस्याओं, संघर्षों, निराशाओं आदि को प्रस्तुत करता है।
·  इस परीक्षण का क्रियान्वयन दो सत्रों में होता है- पहले सत्र में 10 कार्ड तथा दूसरे सत्र में अंतिम 10 कार्ड व्यक्ति को देकर उसे आधार पर कहानी लिखने को कहा जाता है।
·  मर्रे के अनुसार दोनों सत्रों में कम से कम 24 घंटों का अन्तर होना चाहिए।
·  सभी कार्डों के आधार पर कहानी-लेखन का कार्य समाप्त होने पर साक्षात्कार किया जाता है जिसका उद्देश्य यह जानना हाता है कि कहानी लिखने में व्यक्ति की कल्पनाशक्ति का स्रोत, मात्र चित्र था या कोई बाहर की घटना भी रही।
मर्रे के अनुसार इस परीक्षण का विश्लेषण निम्नांकित प्रसंगों में किया जाता है
1. नायक (Hero) प्रत्येक कहानी में नायक या नायिका का पता लगाया जाता है। ऐसा समझा जाता है कि व्यक्ति इस नायक या नायिका के साथ आत्मीकरण स्थापित कर अपने व्यक्तित्व के शीलगुणों, विशेषकर अपनी महत्त्वपूर्ण आवश्यकताओं को दिखाता है।
2. आवश्यकता (Need) प्रत्येक कहानी में नायक या नायिका की मुख्य आवश्यकताएँ क्या - क्या हैं, इसका पता लगाया जाता है। मर्रे के अनुसार TAT परीक्षण के द्वारा मानव की 28 आवश्यकताओं का मापन होता है। इनमें प्रमुख है - उपलब्धि आवश्यकता, संबंधन आवश्यकता तथा प्रभुत्व आवश्यकता।
3. प्रेस (Press) प्रेस (शक्ति या बल) से तात्पर्य कहानी के उस वातावरण संबंधी बलों से होता है, जिससे कहानी के नायक की आवश्यकता या तो पूरी होती है या पूरी होने से वंचित रह जाती है। मर्रे के अनुसार ये शक्तियां या बल 30 से भी अधिक है जो वातावरण संबंधी है। जैसे-आक्रामकता या आक्रमण तथा शारीरिक खतरा।
4. थीमा (Thema) प्रत्येक कहानी की थीमा का निर्धारण किया जाता है। थीमा से तात्पर्य नायक की आवश्यकता तथा प्रेस अर्थात् वातावरण-संबंधी बल की अन्त:क्रिया से उत्पन्न घटना से होता है। थीमा द्वारा व्यक्तित्व में निरन्तरता का ज्ञान होता है।
5. परिणाम (Outcome) परिणाम से तात्पर्य इस बात से होता है कि कहानी को किस तरह समाप्त किया गया है। कहानी का निष्कर्ष निश्चित है या अनिश्चित है। निश्चित एवं स्पष्ट निष्कर्ष होने से व्यक्ति में परिपक्वता तथा वास्तविकता के ज्ञान होने का बोध होता है।

बाल-अन्‍तर्बोध परीक्षण [Children Apperception Test (C.A.T)]
                इस परीक्षण का निर्माण ल्‍योपोल्‍ड बेलाक ने सन् 1948-49 में किया तथा इसका प्रकाशन सन् 1954 में तथा संशोधित रूप 1993 में भी किया गया।
·   इस परीक्षण को बाल सम्‍प्रत्‍यय परीक्षण भी कहते है। 
·  इसका अन्य संशोधन एवं विकास डॉ. अरनेष्ट क्रिस ने सन् 1951 में भी किया था।
·  इस परीक्षण में 10 कार्डों पर पशुओं के चित्र बने होते है।
·  बालकों को कार्ड/चित्र दिखाकर कहानी लिखने के लिए कहा जाता है।
·  यह परीक्षण भी व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों रूपों में प्रयोग में लाया जाता है।
·  यह परीक्षण 3 से 10 वर्ष के बालक-बालिकाओं के लिए उपयोगी है।
· इस परीक्षण में बालक कहानी बनाते समय अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को भी प्रस्तुत करता है, जो बच्चों की समस्याओं को प्रकट करती हैं।

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