Sunday, 23 July 2017

व्‍यक्तित्‍व का अर्थ, परिभाषाऐं एवं वर्गीकरण

व्‍यक्तित्‍व का अर्थ, परिभाषाऐं एवं वर्गीकरण
(Meaning of personality, definitions and classifications)
व्‍यक्तित्‍व का अर्थ
   व्‍यक्तित्‍व का अंग्रेजी अनुवाद Personality है  जो लैटिन भाषा के शब्‍द परसोना (Persona) से बना है, जिसका अर्थ नकाब (mask) या मुखौटा होता है।
   व्‍यक्तित्‍व को इस शब्‍द के अनुसार बाहरी वेश-भूषा तथा दिखावे के आधार पर परिभाषित किया जाता था।
   जिस व्‍यक्ति का बाहरी दिखावा साधारण होता था, उसका व्‍यक्तित्‍व उतना अच्‍छा नहीं समझा जाता था परन्‍तु जिस व्‍यक्ति का बाहरी दिखावा भड़कीला होता था, उसका व्‍यक्तित्‍व अच्‍छा समझा जाता था।
   परन्‍तु, इस तरह की परिभाषा को तुरंत ही अवैज्ञानिक घोषित कर दिया गया।
   इसके बाद धीरे-धीरे विभिन्‍न मनोवैज्ञानिकों ने व्‍यक्तित्‍व की अनेक परिभाषाएँ दी। 
व्‍यक्तित्‍व की परिभाषाऐं
आलपॉर्ट के अनुसार-''व्यक्तित्व उन मनोदैहिक व्यवस्थाओं (गुणों) का गत्यात्मक संगठन है, जो वातावरण के साथ उसके अपूर्व समायोजन को निर्धारित करते हैं।"
बोरिंग के अनुसार'वातावरण के साथ सामान्य एवं स्थायी समायोजन ही व्यक्तित्व है।'
वैलेन्टाइन के अनुसार'व्यक्त्वि जन्मजात एवं अर्जित प्रवृत्तियों का योग है।'
वुडवर्थ के अनुसार'व्यक्तित्व व्यक्ति की संपूर्ण गुणात्मकता है।'
मन के अनुसार'व्यक्तित्व एक व्यक्ति के व्यवहार के तरीकों, दृष्टिकोणों, क्षमताओं, योग्यताओं तथा अभिरूचियों का विशिष्टतम संगठन हैं।'
आइजेन्‍क के अनुसार, ''व्‍यक्तित्‍व, व्‍यक्ति के चरित्र, चित्रप्रवृत्ति, ज्ञानशक्ति तथा शरीरगठन का करीब-करीब एक एक स्‍थायी एवं टिकाऊ संगठन है जो वातावरण में उसके अपूर्व समायोजन का निर्धारण करता है।''
इन परिभाषाओं के आधार पर व्‍यक्तित्‍व के गुण
  1. मनोशारीरिक तंत्र
  2. गत्‍यात्‍मक संगठन
  3. वातावरण के साथ अपूर्व समायोजन का निर्धारण
व्यक्तित्व का वर्गीकरण
जुंग द्वारा किया गया मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण : वर्तमान में जुंग/युंग का वर्गीकरण सर्वोत्तम माना जाता है। इन्होंने मनोवैज्ञानिक लक्षणों के आधार पर व्यक्तित्व के तीन भेद माने जाते है-(i) अन्तर्मुखी, (ii) बहिर्मुखी तथा (iii) उभयमुखी-
(i) अन्तर्मुखी-अंतर्मुखी झेंपने वाले, आदर्शवादी और संकोची स्वभाव वाले होते है। इसी स्वभाव के कारण वे अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में असफल रहते है। ये बोलना और मिलना कम पसंद करते है। पढ़ने में अधिक रूचि लेते है। इनकी कार्य क्षमता भी अधिक होती है।
(ii) बहिर्मुखी-बहिर्मुखी व्यक्ति भौतिक और सामाजिक कार्यो में विशेष रूचि लेते है। ये मेलजोल बढ़ाने वाले और वाचाल होते हैं। ये अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकते हैं। इनमे आत्मविश्वास चरम सीमा पर होता है और बाह्य सामंजस्य के प्रति सचेत रहते है।
(iii) उभयमुखी-इस प्रकार के व्यक्ति कुछ परिस्थितियों में बहिर्मुखी तथा कुछ में अंतर्मुखी होते है। जैसे एक व्यक्ति अच्छा बोलने वाला और लिखने वाला है, किन्तु एकांत में कार्य करना चाहता है।
भारतीय दृष्टिकोण से व्यक्तित्व का वर्गीकरण
          भारतीय दृष्टिकोण से व्यक्तित्व को तीन भागों में विभक्त किया गया है
1. सतोगुणीगुण ही गुण, ईश्वर व धर्म में विश्वास।
2. रजोगुणीराजसी प्रवृत्ति वाला, कर्म में विश्वास करता है।
3. तमोगुणीअवगुण ही अवगुण, अपने सुख की प्राप्ति के लिए कर्म करना।
कैचमर का शरीर रचना पर आधारित वर्गीकरण :
(i) एस्थेनिक - इस तरह के व्‍यक्ति का कद लम्‍बा होता है, परन्‍तु वे दुबले-पतले शरीर के होते है। मांसपेशियां अविकसित, वजन कम, स्‍वभाव कुछ चिड़चिड़ा, दिवास्‍वप्‍न आदि गुण होते है। क्रेश्‍मर ने इस प्रकार की प्रवृत्ति के लोगों को 'सिजोआड' (schizoid) की संज्ञा दी है। यह व्‍यक्तित्‍व का शक्तिहीन प्रकार है।
(ii) एथलेटिक - इस प्रकार के लोग खिलाड़ी प्रवृत्ति के होते है। व्‍यक्ति के शरीर की मांसपेशियां काफी विकसित एवं गठी होती हैं तथा शारीरिक कद न तो लम्‍बा और न तो अधिक छोटा होता है। इनका पूरा शरीर सुडौल एवं हर तरह से सं‍तुलित दिखाई देता है। ऐसे व्‍यक्ति बदलती हुई परिस्थिति के साथ आसानी से समायोजन कर लेते हैं। अत: इन्‍हें सामाजिक प्रतिष्‍ठा काफी मिलती है।
(iii) पिकनिक - ऐसे व्‍यक्ति का कद छोटा होता है तथा शरीर भारी एवं गोलाकार होता है। ऐसे लोगों की गर्दन छोटी एवं मोटी होती है। ऐसे व्‍यक्ति खाने-पीने तथा सोने में काफी मजा लेते हैं तथा  खुशमिजाज हाते है।
शेल्‍डन के अनुसार वर्गीकरण -
       शेल्‍डन ने सन् 1940 में शरीरगठन के आधार पर दूसरा सिद्धान्‍त बनाया जिसे सोमैटोटाईप सिद्धान्‍त कहा गया। शेल्‍डन ने भी व्‍यक्तित्‍व के तीन प्रकार बतायें, जो निम्‍न है
 i. एण्‍डोमार्फी - इस प्रकार के व्‍यक्ति मोटे एवं नाटे होते हैं और इनका शरीर गोलाकार दिखता है। यह क्रेश्‍मर के पिकनिक प्रकार से मिलता जुलता है।
ii. मेसोमार्फी - इस प्रकार के व्‍यक्ति के शरीर की हड्डियां एवं मांसपेशियां काफी विकसित होती हैं तथा शारीरिक गठन काफी सुडोल होता है। यह केश्‍मर के एथलेटिक प्रकार के समान होता है।
iii. एक्‍टोमार्फी - इस प्रकार के व्‍यक्ति का कद लम्‍बा होता है, परन्‍तु ये दुबले - पतले होते है। ये अकेला रहना तथा संकोचशील होते है। इस प्रकार के व्‍यक्तित्‍व को लम्‍बाकार भी कहते है।
आइंजनेक के अनुसार
1. अन्तर्मुखताबहिर्मुखला
2. स्नायुविकृतिस्थिरता
3. मनोविकृततापरा अहम् की क्रियाएँ
थार्नडाइक का चिंतन पर आधारित वर्गीकरण :
(i) सूक्ष्म विचारक
(ii) प्रत्यक्ष विचारक
(iii) स्थूल विचारक।
स्प्रेन्गरस्प्रेन्गर ने समाजशास्त्रीय आधार पर व्यक्तित्व का वर्गीकरण किया है
1. सैद्धान्तिक प्रवृति वालेकवि, लेखक, दार्शनिक।
2. राजनैतिक प्रवृति वालेमंत्री, नेता, उत्साहित, प्रचारक।
3. सामाजिक प्रवृति वालेदयावान, मिलनसार, सहानुभूति रखने वाले।
4. सौन्दर्यात्मक प्रवृति वालेकलाकार, मूर्तिकार, प्रकृति प्रेमी, साहित्यकार।
5. आर्थिक प्रवृति वालेव्यापारी, दुकानदार, उद्योगपति।
6. धार्मिक प्रवृति वालेसंत, पुजारी, भक्त।


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