Wednesday, 7 June 2017

पावलव का अनुकूलित/ अनुबन्धित अनुक्रिया सिद्धान्‍त

पावलव का अनुकूलित/ अनुबन्धित अनुक्रिया सिद्धान्‍त

                आई. पी. पावलव एक रूसी शरीर-वैज्ञानिक थे। इनका पूरा नाम इवान पत्रोविच पावलाव था। इन्‍होंने पाचन क्रिया के दैहिकी का विशेष रूप से अध्‍ययन किया और उनका यह अध्‍ययन इतना महत्त्वपूर्ण एवं लोकप्रिय हुआ कि 1904 ई. में इसके लिए उन्‍हें नोबल पुरस्‍कार भी दिया गया। पावलव ने इस सिद्धान्‍त का नाम अनुबंधित अनुक्रिया सिद्धांत बताया। 
इस सिद्धान्त के अपर नाम
शास्त्रीय अनुबंधन का सिद्धान्त
सम्बन्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त
C.R. Theory
क्‍लासिकी अनुबन्‍ध सिद्धान्‍त
अनुकूलित/अनुबन्धित अनुक्रिया सिद्धान्‍त

पावलव के बारे में विशेष
पावलव को अनुबन्धन का जनक कहा जाता है।
पावलव को अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त के लिए 1904 में नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया।
मनोवैज्ञानिक के साथ-साथ पावलव एक चिकित्सक भी थे।
पावलव ने कुत्ते की पेरोटिड ग्रन्थि का ऑपरेशन कर लार का एकत्रीकरण किया।

पावलव का प्रयोग
पावलव ने कुत्ते पर प्रयोग को तीन चरणों में पूरा किया।
प्रथम चरण— U.C.S. (भोजन) = U.C.R. (लार)
                इस प्रयोग में कुत्ते को स्वभाविक उद्दीपन होने/अनानुकूलित उद्दीपन/अनानुबन्धित उद्दीपन (Unconditional Stimules) भोजन प्रस्तुत किया, जिसके प्रति कुत्ते ने स्वाभाविक अनुक्रिया अनानुकूलित अनुक्रिया/ अनानुबन्धित अनुक्रिया (Unconditional Respons) लार प्रवाहित की।

द्वितीय चरणC.S.  (घन्टी) + U.C.S. (भोजन) = U.C.R. (लार)
                दूसरे चरण में अस्वभाविक उद्दीपन/अनुकूलित उद्दीपन/अनुबन्धित उद्दीपन/ Conditional Stimules   घन्टी के साथ स्वाभाविक उद्दीपन भोजन प्रस्तुत किया जिसके प्रति कुत्ते ने स्वाभाविक अनुक्रिया लार गिरायी।

तृतीय चरणC.S. (घन्टी) =  C.R. (लार)
                तीसरे चरण में अस्वाभाविक उद्दीपन घन्टी प्रस्तुत कि जिसके प्रति कुत्ते ने अस्वाभिक अनुक्रिया/ अनुकूलित अनुक्रिया/ अनुबन्धित अनुक्रिया/ Conditional Response (लार) प्रवाहित की।

                इस प्रयोग द्वारा पावलाव ने यह निष्कर्ष निकाला कि यदि लम्बे समय तक स्वभाविक तथा अस्वाभाविक उद्दीपन का एक साथ प्रस्तुत किया जाये तो व्यक्ति अस्वाभाविक उद्दीपन के प्रति भी स्वभाविक जैसी अनुक्रिया करने लगता हैं। इसे अनुकूलित अनुक्रिया अथवा अनुबन्धित अनुक्रिया कहते है।

वाटसन का प्रयोग
                वाटसन ने इस प्रयोग के समर्थन में, अपनी पत्नी रैनर के साथ (1920 में) मिलकर अपने पुत्र अल्बर्ट (11 माह) पर प्रयोग किया। अल्बर्ट के सम्मुख बालों वाला खिलौना तथा डरावनी ध्वनि को एक साथ प्रस्तुत किया गया। परिणामस्वरूप अल्बर्ट डरकर रोने लगा। कुछ समय बाद यह देखा गया कि अल्बर्ट के सम्मुख जब भी कोई बालो वाली वस्तु प्रस्तुत कि जाती तो अल्बर्ट डर कर रोने लगता। यह सब अनुबन्धन के कारण होता है।

शास्त्रीय अनुबन्ध प्रयोग के बारे में विशेष
अस्वाभाविक या कृत्रिम उत्तेजक के कारण स्वभाविक या प्राकृतिक उत्तेजक के समान हुई प्रतिक्रिया को 'सम्बद्ध प्रतिक्रिया' या 'सम्बद्ध सहज क्रिया' कहते हैं।
जो क्रिया (लार का गिरना) स्वभाविक उद्दीपक (भोजन) के प्रति हो रही थी, वही क्रिया अस्वभाविक उद्दीपक (घण्टी) के प्रति होने लगी, इसी को हम अनुकुलित अनुक्रिया सिद्धान्त कहते है।
पुनरावृति के आधार पर जो सम्बन्ध स्थापित होता है, उसे अनुबन्धन कहते है।
अनुबन्धन स्थापित हो जाने के बाद यदि बारबार मात्र अनुबन्धित उद्दीपक (घण्टी) ही प्रस्तुत किये जाने पर अन्ततोगत्वा अनुबन्धित अनुक्रिया का बन्द हो जाना विलोप कहलायेगा।

शास्त्रीय अनुबन्धन का शैक्षिक महत्त्व
 (1)         सतर्क रहना।
 (2)         शिक्षण में दृश्य, श्रव्य सामग्री का प्रयोग।
 (3)         पुनरावृति पर बल।
 (4)         पुनरावृति के आधार पर अनुबन्धन स्थापित करने पर बल।
 (5)         भाषा को सीखने व सीखाने के लिए विशेष उपयोगी।
 (6)         आदतों के निर्माण में विशेष उपयोगी।
 (7)         यान्त्रिक तरीके से सीखने पर बल।
 (8)         इसी प्रकार बालकों में प्रेम व घृणा का विकास होता है।
 (9)         भय, सम्बन्धित मानसिक भ्रान्तियों को दूर करने में सहायक।

 (10)       इस सिद्धान्त के अनुसार बालकों से कभी भी ऐसे शब्दों की पुनरावृति न करे जो कुण्ठाओं में बदल जाये।

11 comments:

  1. सबसे अच्छे ओर आसान तरीके से सीखने के लिए सहायक

    ReplyDelete
  2. बेहतर तरीके से स्मझाया गया है

    ReplyDelete
  3. Anukriya anubandhan kis pr bl deta hai

    ReplyDelete
    Replies
    1. स्वप्रयास से सीखने पर बल

      Delete
  4. पावलाव ने अनुबंध सिद्धांत मे किसे सवोच्च स्थान दिया था

    ReplyDelete
  5. V easy method. ...
    Thanks a lot respected Sir .....

    ReplyDelete
  6. Very nice Sir for exesies

    ReplyDelete

CTET 2019 Answer Key Paper - 2 (Class-VI-VIII) Child Development & Pedagogy

CTET 2019 Answer Key Paper - 2 (Class-VI-VIII) Child Development & Pedagogy  ( बाल विकास एवं शिक्षा शास्‍त्र ) 1. विकास में व...