Friday, 16 June 2017

संरचनात्‍मक अधिगम सिद्धान्‍त

संरचनात्‍मक अधिगम सिद्धान्‍त
प्रवर्तकजैरोम एस. ब्रूनर (1960)
अन्य नामअन्वेषण सिद्धान्त/संरचनात्मक सिद्धान्त
इसके अनुसार किसी भी व्यक्ति को ज्ञान की संरचना से अवगत करवाना चाहिए क्योंकि वह व्यक्ति एक बार संरचना को सीख जाता हैं तो भविष्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं करता हैं।

       यदि बालक को कम्प्यूटर का ज्ञान करवाना चाहते हैं। तो बालक को कम्प्यूटर के समस्त उपकरणों के निर्माण कि प्रक्रिया बताते हुए अधिगम करवाना चाहिए।
वर्तमान में शिक्षा जगत में एक नये पद संरचनात्मकता का प्रयोग अधिगम में किया जा रहा है।
संरचनात्मक शब्द का तात्पर्य है अधिगमकत्र्ता के द्वारा स्वयं के लिए ज्ञान की संरचना करना।
जैरोम ब्रूनर ने सीखने का अधिगम वक्र भी दिया।

ब्रूनर के अनुसार जो भी विषय पढ़ाया जाये, उसकी मूल संरचना के अध्यापन में निम्नलिखित तत्त्व होने चाहिए, जो निम्न है
1. आधारभूत सिद्धान्तों के ज्ञान से विषय को समझना।
2. मूल व आधारभूत सिद्धान्त स्मृति में अधिक देर तक बने रहते हैं।
3. मूल सिद्धान्तों व प्रत्ययों की समझ प्रशिक्षण के अन्तरण का मुख्य साधन है।
4. संरचना सिद्धान्तों के शिक्षण पर बल देने के लिए प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाये जाने वाली सामग्री पर निरन्तर पुनर्विचार किया जाये ताकि वहाँ उच्च व प्राथमिक ज्ञान के अन्तर को कम किया जा सके।

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