Sunday, 11 June 2017

अन्‍तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्‍त

अन्‍तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्‍त

सन् 1920 ई. में जर्मनी में गेस्टाल्ट सम्प्रदाय का उदय हुआ। सम्प्रदाय से सम्बन्धित तीन व्यक्ति थे
(1) मेक्स वर्दीमरप्रवर्तक,               
(2) कोहलरप्रयोग,
 (3) कोफ्कासहयोगकर्त्ता
ये तीनों गेस्टाल्टवादी कहलाये तथा इन्होंने जो सिद्धान्त दिया, वह सिद्धान्त गेस्टाल्ट सिद्धान्त कहलाया।
कोहलर ने सुल्तान नामक चिम्पेंजी पर प्रयोग किया।
गेस्टाल्ट एक जर्मन भाषा का शब्द हैं जिसका अर्थ है समग्राकृति अथवा सम्पूर्णाकार।
गैस्टाल्टवाद के अनुसार कोई भी व्यक्ति, समस्या के समग्राकार को देखता हैं एवं उसके आधार पर मानसिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिगम करता हैं—'गैस्टाल्टवादियों ने सुल्तान नामक एवं चिपांजी पर प्रयोग करते हुए इस सिद्धान्त पर प्रयोग किया।'

इस सिद्धान्‍त के अन्‍य नाम है
       अन्‍तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्‍त
       गेस्‍टाल्‍ट सिद्धान्‍त
       समग्राकार सिद्धान्‍त
       कोहलर का सिद्धान्‍त

प्रयोग 1 : कोहलर ने एक भूखे चिम्पाजी को एक कमरे में बंद किया। कमरे की छत में कुछ केले इस प्रकार टाँग दिए कि वे चिम्पाजी की पहुँच के बाहर थे। कमरे में कुछ दूरी पर तीन-चार खाली बक्से भी रखे गए। चिम्पांजी ने उछल कर केले लेने का प्रयास किया पर सफल नहीं हुआ। कुछ समय पश्चात फर्श पर रखे खाली बक्सों को देखकर उनको केले के नीचे खींच कर उस पर चढ़ गया केले प्राप्त कर लिए। यह उसकी सूझ ही है जिसने उसे अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफलता दी। चिम्पान्जी के समान बालक और व्यक्ति भी सूझ द्वारा सीखते हैं।

प्रयोग 2. सुल्तानपिंजरे में बंदबहर रखे केलेसमग्राकार का निरीक्षणदो छडिय़ों को परस्पर, जोड़कर केलों की प्राप्ति।

       इस प्रयोग द्वारा गैस्टाल्टवादियों ने यह स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति अधिगम हेतु प्रयास एवं त्रुटि नहीं करता अपितु मानसिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए अधिगम करता हैं।
इस सिद्धान्त के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में पूर्ण से अंश की ओर शिक्षण सूत्र का जन्म हुआ।
इस सिद्धान्त से समस्या-समाधान विधि एवं विश्लेषण विधि का जन्म हुआ।

शैक्षिक महत्त्व
(1)    छोटे बालकों जिनकी बुद्धि का पूर्ण विकास नहीं हो जाता है, वे प्रयास व त्रुटि के सिद्धान्त से सीखते है, लेकिन किशोर जिनकी बुद्धि में पूर्ण विकास हो जाता है वे सूझ व अन्र्तदृष्टि के द्वारा ही सिखते है।
(2)    पूर्ण से अंश की ओर शिक्षण सूत्र इस सिद्धान्त की देन है।
(3)    अध्यापक को चाहिए वह बालकों को समस्या का पूरा ज्ञान करवाये यदि समस्या के प्रति ज्ञान अपूर्ण है, तो अन्तर्दृष्टि नहीं हो सकती।


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