Saturday, 3 June 2017

अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा

अधिगम का अर्थ एवं परिभाषा

अधिगम एक नजर में
·         अधिगम का सामान्य अर्थ होता हैसीखना या व्यवहार में परिवर्तन।
·         परिवर्तन अनुभवों के द्वारा प्राप्त होता है।
·         अधिगम एक मानसिक क्रिया है, जिससे अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकें।
·         सार्वभौमिक अनुभव भी अधिगम करवाता है।

अधिगम/सीखना (Learning)
                अर्थसीखना/अधिगम एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है। मनोवैज्ञानिकों ने इसे एक मानसिक प्रक्रिया माना है जो कि जीवनभर चलती रहती है जिसमें बालक परिपक्वता की ओर बढ़ता हुआ, अपने अनुभवों एवं प्रशिक्षणों से लाभ उठाता हुआ, अपने स्वाभाविक व्यवहार या अनुभूति में प्रगतिशील परिवर्तन, परिमार्जन करता है, उसी को अधिगम कहते हैं। अत: सीखने की प्रक्रिया दो प्रकार से निरन्तर और सार्वभौमिकता से सदैव और सर्वत्र चलती रहती है।
इसलिए तो विलियम वुडवर्थ ने कहा है कि
·         ''सीखना विकास की प्रक्रिया है।'' (Learning is a process of developmnt)
·         ''सीखना अनुभव द्वारा व्यवहार में परिवर्तन है।''
उदाहरण
1.            एक बालक का आग से जलकर दुबारा न जलना या दुबारा पास न जाना।
2.            बंदर (भूखे) (प्रतिक्रिया) द्वारा केला या आम छीनना स्वभाविक (Instinctive) क्रिया है। आम हाथ फैलाकर माँगना सीखी हुई क्रिया है।

अधिगम की परिभाषाएँ
(1)     मार्गन के अनुसारअधिगम अपेक्षाकृत व्यवहार में स्थायी परिवर्तन है, अभ्यास के परिणामस्वरूप होता है।
(2)    गेट्सअनुभव एवं प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में संशोधन ही अधिगम है।
(3)    स्कीनरव्यवहार में उत्तरोत्तर अनुकूलन की प्रक्रिया ही अधिगम है।
(4)    क्रो एण्ड क्रोअधिगम आदतों, ज्ञान एवं अभिवृत्तियों का अर्जन है।
(5)    गिलफोर्डपूर्व निर्मित व्यवहार के कारण व्यवहार में आये परिवर्तन ही अधिगम है।
(6)    कॉलविलव्यवहार में अनुभव द्वारा परिवर्तन ही अधिगम है।
(7)    एम.एस. चौहानप्राणी के व्यवहार में परिवर्तन लाना ही अधिगम है।
(8)    क्रौनबैकअनुभव के परिणाम व्यवहार परिवर्तन ही अधिगम है।
       सीखना क्रिया द्वारा व्यवहार में परिवर्तन है जो कि व्यक्ति को पूर्व अनुभवों पर आधारित होता है।

अधिगम/सीखने की प्रक्रिया में सोपान  (Steps)
1.         M = Motivation                          (अभिप्रेरणा)
2.        P = Person                                   (व्‍यक्ति)
3.        VR = Various Responses             (विभिन्‍न क्रियाएँ)
4.        B = Barrier                                   (बाधाएँ)
5.        CR = Correct Responses              (सही अनुक्रियायें)
6.        R = Reinforcement                       (पुनर्बलन)
7.        O = Organisation                          (संगठन)
8.        G = Goal                                       (उद्देश्‍य/लक्ष्‍य)

अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक / घटक
(1)      बुद्धिसत्य / असत्य का ज्ञान करवा दे, उसे बुद्धि कहते है।
(2)      अभिक्षमता
(3)      अभिवृत्ति / प्रवृत्ति
(4)   सीखने की विधि
(5)      अभिप्रेरणा
(6)   उम्र / स्वास्थ्य
(7)      सीखने की तत्परता
(8)   परिणाम / प्रगति का ज्ञान
(9)      संप्रेषण
(10) अध्यापक का विषय पर अधिकार
(11)    रुचि या रुझान
(12)    परिपक्वता
(13)    अभ्यास

अधिगम के प्रकार —
1.    ज्ञानात्मक अधिगमयह बौद्धिक विकास तथा ज्ञान अर्जित करने की समस्त क्रियाओं में प्रयुक्त होता है। ज्ञानात्मक अधिगम तीन प्रकार का होता है—(1) प्रत्यक्षात्मक, (2) प्रत्यात्मक, (3) साहचर्यात्मक।
(i)   प्रत्यक्षात्मक सीखना (Perceptual Learning) जब किसी वस्तु को देखकर, सुनकर या स्पर्श करके ज्ञान प्राप्त किया जाता है तो उसे प्रत्यक्षात्मक सीखना कहते है। शैशवावस्था व बाल्यावस्था में।
(ii)   प्रत्यात्मक सीखना (Conceptual Learning)जब बालक साधारण ज्ञान या अनुभव प्राप्त कर लेता है तो वह तर्क चिन्तन और कल्पना के आधार पर सीखने लगता है। इस प्रकार वह अनेक अमूर्त बातें सीख जाता है। बालक के इस प्रकार से सीखने को ही प्रत्यात्मक सीखना कहा जाता है।
(iii)  साहचर्यात्मक सीखना (Association Learning)जब पुराने ज्ञान तथा अनुभव के द्वारा किसी तथ्य को सीखा जाता है तो उसे साहचर्यात्मक सीखना कहते है।
2.        भावात्मक अधिगमइस प्रकार के अधिगम का सम्बन्ध ज्ञान व कौशल से न होकर बालकों की कोमल भावनाओं या मनोभावनाओं से होता है। इस अधिगम का उद्देश्य यह है कि बालक किसी वस्तु को देखकर किसी आवाज को सुनकर या किसी लुभावने रंग को निरखकर आनन्द की अनुभूति कर सके परन्तु आवश्यक है कि बच्चों की रुचि को ध्यान में रखा जाए।
3.        क्रियात्मक अधिगमइस अधिगम में कला में (हस्त शिल्प) निपुणता प्राप्त की जाती है। संगीत, नृत्य, मॉडल बनाना, ड्रॉईंग आदि कौशल इसी के अन्तर्गत आते है।
→       कौशल प्राप्ति के चरण—(1) तैयारी, (2) उद्देश्य, (3) प्रस्तुतीकरण या प्रदर्शन, (4) अभ्यास, (5) शुद्धिकरण, (6) पुन: अभ्यास।

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