Sunday, 21 May 2017

शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्‍यकता एवं उपयोगिता

शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्‍यकता एवं उपयोगिता

कक्षा-कक्ष परिस्थितियों में शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्यकता
शिक्षा मनोविज्ञान के अध्ययन का उद्देश्य जिस प्रकार शिक्षक शिक्षार्थियों, शिक्षा आदि से सम्बन्धित है, उसी प्रकार उसकी उपयोगिता भी है। आज विश्व में मनोवैज्ञानिक ही नही अपितु शिक्षाशास्त्री, दार्शनिक, समाज-सुधारक, शिक्षक, राजनीतिज्ञ एवं मनोविश्लेषक भी इस बात को स्वीकार करते है कि शिक्षा मनोविज्ञान के सिद्धान्तों पर आधारित होनी चाहिए।
इसके महत्त्व को स्पष्ट करते हुए जेम्स ड्रेवर ने लिखा है, ''मनोविज्ञान एक महत्त्वपूर्ण कारक है। हम मनोविज्ञान की सहायता लिए बिना शिक्षा की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते।''
उपर्युक्त दृष्टिकोण से शिक्षा मनोविज्ञान की उपयोगिता एवं महत्त्व निम्न तीन बिन्दुओं को ध्यान में रखकर किया जा सकता है
(1) शिक्षक के दृष्टिकोण से,
(2) शिक्षार्थी के दृष्टिाकोण से,
(3) शिक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से।

(1)     शिक्षक के दृष्टिकोण से
  • स्वयं का ज्ञान एवं तैयारी
  • बाल विकास की विभिन्न अवस्थाओं का ज्ञान
  • बालक के स्वभाव व व्यवहार का ज्ञान
  • बालकों का चरित्र-निर्माण
  • बालक की आवश्यकताओं का ज्ञान
  • बालकों की व्यक्तिगत भिन्नताओं का ज्ञान
  • बालकों के व्यक्तित्व का सर्वांगिक विकास
  • कक्षा की समस्याओं का समाधान
  • अनुशासन स्थापित करने में सहायक
  • उपर्युक्त शिक्षण विधियों का प्रयोग
  • उचित पाठ्यक्रम निर्माण में
  • उचित व्यावसायिक निर्देशन प्रदान करने में


(2)     शिक्षार्थी (छात्र) के दृष्टिकोण से
  • वंशानुक्रम एवं वातावरण का ज्ञान। 
  • मानसिक क्रियाओं का ज्ञान।
  • योग्यता एवं क्षमताओं का ज्ञान।     
  • मूल प्रवृत्तियों एवं रुचियों का ज्ञान।
  • आत्ममूल्यांकन का ज्ञान।


(3)     शिक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से।
  • उद्देश्य के बारे में ज्ञान।
  • पाठ्यक्रम के निर्माण का ज्ञान।
  • विद्यालयी वातावरण को उपयुक्त बनाने में ज्ञान।       
  • अनुशासन स्थापित करने में।
  • मूल्यांकन की नवीन पद्धतियों का ज्ञान।


अभिभावकों का मार्गदर्शन करना
  • शिक्षा मनोविज्ञान न केवल शिक्षक एवं शिक्षार्थी का मार्गदर्शन करता है बल्कि अभिभावकों को भी उचित सलाह देकर उनका मार्ग दर्शन करता है।
  • कुछ अभिभावक ऐसे होते हैं जो अपने बच्चों की मानसिक योग्यता, अभिरुचि तथा अभिक्षमता का बिना खयाल किए ही किसी खास विषय या किसी खास प्रकार के कौशल को सीखने पर बल डालते हैं। जिससे बालक की शिक्षा असफल हो जाती है।
  • शिक्षा मनोविज्ञान ऐसे अभिभावकों का उचित मार्गदर्शन करता है तथा उन्हें अपनी शारीरिक एवं मानसिक कमजोरियों से भी अवगत कराता है ताकि वे अपने आप में समुचित परिवर्तन लाकर अपने बच्चों की उचित शिक्षा में मदद करें।


कैली ने शिक्षा मनोविज्ञान की आवश्यकता को निम्नानुसार बताया हैः-
  • बालक के स्वभाव का ज्ञान प्रदान करने हेतु,
  • बालक को अपने वातावरण से सामंजस्य स्थापित करने के लिए,
  • शिक्षा के स्वरूप, उद्देश्यों और प्रयोजनों से परिचित करना,
  • सीखने और सिखाने के सिद्धांतों और विधियों से अवगत कराना,
  • संवेगों के नियंत्रण और शैक्षिक महत्व का अध्ययन,
  • चरित्र निर्माण की विधियों और सिद्धांतों से अवगत कराना,
  • विद्यालय में पढ़ाये जाने वाले विषयों में छात्र की योग्यताओं का माप करने की विधियों में प्रशिक्षण देना,
  • शिक्षा मनोविज्ञान के तथ्यों और सिद्धांतों की जानकारी के लिए प्रयोग की जाने वाली वैज्ञानिक विधियों का ज्ञान प्रदान करना।


शिक्षा के उद्देश्य
मनोविज्ञान शिक्षा के उद्देश्यों को अच्छी तरह से समझने में निम्न प्रकार सहायता प्रदान करता है।
(1) उद्देश्यों को परिभाषित करके - उदाहरणार्थ - शिक्षा का एक उद्देश्य है अच्छे नागरिक के गुणों का विकास करना। इसमें अच्छे नागरिक से क्या तात्पर्य है। अतः अच्छे नागरिक को व्यवहारिक रूप में परिभाषित करना चाहिए।
(2) उद्देश्यों को स्पष्ट करके - उपर्युक्त उदाहरण के अनुसार व्यक्ति के कौन से व्यवहार अथवा लक्षण अच्छे नागरिक में होने चाहिए। अर्थात् ऐसे कौन से व्यवहार हैं या लक्षण हैं जो अच्छे नागरिक में नहीं पाए जाते और इसके विपरीत जिनकों हम अच्छा नागरिक कहते हैं उनमें वे व्यवहार पाए जाते हैं।
(3) उद्देश्य प्राप्ति की सीमा निर्धारित करके - वर्तमान परिस्थिति में शिक्षा देते समय एक कक्षा के शत प्रतिशत विद्यार्थियों को शत प्रतिशत अच्छे नागरिक बनाना असंभव हो जाता है। अतः इसकी सीमा निर्धारित करना जैसे 80 प्रतिशत विद्यार्थियों के 80 प्रतिशत व्यवहार अच्छे नागरिक को परिलक्षित करेंगे।
(4) उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए क्या करना है अथवा क्या नही - प्राथमिक स्तर पर अच्छे नागरिक के गुणों को विकास करने के लिए शिक्षक को भिन्न व्यवहार करना होगा और उच्च स्तर पर इसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए भिन्न व्यवहार करना होगा।
(5) नए पहलुओं पर सुझाव देना - उदाहरणार्थ, मनोवैज्ञानिक दृष्टि से मूल्यांकन में सभी छात्रों को एक समान परीक्षण क्यों दिया जाए जब एक ही कक्षा में भिन्न योग्यता और क्षमता वाले छात्रों को प्रवेश दिया जाता है।


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