Sunday, 3 September 2017

प्रेक्षण या अप्रक्षेपी विधियाँ

प्रेक्षण या अप्रक्षेपी विधियाँ
(Observational or non-prescriptive methods)
साक्षात्‍कार विधि, रेटिंग मापनी, व्‍यक्ति इतिहास आदि विधियों सहित
       प्रेक्षण विधि वह विधि है जिसमें एक परीक्षक, व्‍यक्तियों एवं छात्रों की क्रियाओं का ध्‍यानपूर्वक प्रेक्षण/अवलोकन एक नियंत्रित एवं वास्‍तविक परिस्थिति में करता है तथा फिर उनकी क्रियाओं के लेखा-जोखा का विश्‍लेषण कर उनके व्‍यक्तित्‍व के बारे में परिणाम निकालता है। अप्रक्षेपी विधियों के दो प्रकार माने गये हैं - आत्‍मनिष्‍ठ एवं वस्‍तुनिष्‍ठ।
आत्‍मनिष्‍ठ विधियां
रेटिंग मापनी (Rating Scale) :
       रेटिंग मापनी एक ऐसी मापनी है जिसके सहारे व्‍यक्तित्‍व के शीलगुणों के बारे में लिए गए निर्णय को कुछ श्रेणियों में रिकार्ड किया जाता है। इस मापनी में कुछ संख्‍यात्‍मक श्रेणियां (जैसे +3, +2, +1, 0, –1, –2 ....) बनी होती है या कुछ अन्‍य श्रेणियां बनी होती है। इनका एक खास अर्थ होता है और परीक्षक व्‍यक्तियों के शीलगुणों के बारे में निर्णय कर अपनी प्रतिक्रिया इन श्रेणियों के माध्‍यम से व्‍यक्‍त करता है। बाद में इन निर्णयों का सांख्यिकीय विश्‍लेषण कर, व्‍यक्तित्‍व के बारे में एक निश्चित निष्‍कर्ष पर पहुँचा जाता है। गिलफोर्ड ने 1959 में तथा फ्रीमैन ने 1962 में रेटिंग का निर्माण किया।
रेटिंग मापनी के गुण
  रेटिंग मापनी एक विश्‍वस्‍त एवं दुरुस्‍त मापनी हो जिसे परीक्षक भलीभांति समझता हो तथा हर श्रेणी की जानकारी हो।
  जिन गुणों को रेटिंग मापनी के द्वारा मापा जा रहा हो उनकी जानकारी परीक्षक को होनी चाहिए।
  परीक्षक अपने आपको खोखले प्रभाव से दूर रखे। यानि कि पक्षपात या पूर्वाग्रह का प्रभाव न पड़ने दें। वरना रेटिंग की यथार्थता खत्‍म हो जाती है।
साक्षात्कार विधि
                व्यक्तित्व मापन में साक्षात्कार का प्रयोग सर्वाधिक होता है। साक्षात्कार में भेंटकर्ता उस व्यक्ति से आमने-सामने की परिस्थिति में कुछ वैसे प्रश्नों को पूछकर उनके द्वारा की गई प्रतिक्रियाओं का प्रेक्षण करता है और इसके आधार पर व्यक्तित्व का आंकलन करता है।
·         साक्षात्कार की शुरुआत अमेरिका में हुई।
·         साक्षात्कार में आमने-सामने होना जरूरी होता है।
·         इसमें प्रश्नों का कोई बन्धन नहीं होता तथा कोई निश्चित समय नहीं होता।
·         साक्षात्कार को एक प्रकार का वार्तालाप का रूप माना जाता है।
साक्षात्कार के प्रकार
(i) निर्देशित साक्षात्कारइस प्रकार के साक्षात्कार में विधि, प्रश्नों की भाषा, प्रकार आदि पहले से ही निश्चित कर लिये जाते है।
साक्षात्कार एक सुनियोजित योजना के अनुसार होता है।
(ii) अनिर्देशित साक्षात्कारइस साक्षात्कार को गहन साक्षात्कार, निदानात्मक साक्षात्कार तथा केन्द्रित साक्षात्कार के नाम से भी जाना जाता है।
इस साक्षात्कार की प्रवृत्ति लचीली होती है तथा इसमें प्रश्नों की भाषा, विधि, समय, पहले से ही निश्चित नहीं किये जाते।
इस साक्षात्कार में साक्षात्कारकर्ता मित्रता का वातावरण उत्पन्न करके प्रत्याशी को उन्मुक्त अभिव्यक्ति के लिए प्रोत्साहन देता है।
(iii) समाहार साक्षात्कारयह निर्देशित एवं अनिर्देशित का मिला-जुला रूप है इसमें न तो अनिर्देशित साक्षात्कार जैसी स्वतंत्रता रहती है और न ही निर्देशित जैसा प्रतिबन्ध भी होता है।
अत: यह सर्वश्रेष्ठ व वैध विधि है।
आत्मकथा विधि/अन्तरदर्शन विधि
इस विधि के प्रतिपादक विलियम वुण्ट व उनके शिष्य ई.बी. टीचनर है।
यह प्राचीनतम विधि है तथा यह विधि विज्ञान सम्मत नहीं होने के कारण इसका प्रयोग बहुत कम किया जाता है।
इस विधि में व्यक्ति द्वारा लिखित आत्मकथा के माध्यम उसके व्यक्तित्व का ज्ञान किया जाता है।
आत्मकथाअपनी कहानी, अपने भूतकाल तथा वर्तमान काल का ठीक-ठाक रिकॉर्ड होता है।
व्यक्ति इतिहास विधि/जीवनवृत विधि/केस स्टेडी
व्यक्ति इतिहास विधि निदानात्मक अध्ययनों की सर्वश्रेष्ठ विधि है।
यह विधि असामान्य व समस्यात्मक बालक के निदान की भी सर्वश्रेष्ठ विधि है। कुसमायोजित बालकों के अध्ययन में उपयोगी विधि है।
इस विधि के अन्तर्गत एक सूचना प्रपत्र पर व्यक्ति के इतिहास से सम्बन्धित समस्त जानकारी एकत्रित करते हुए व्यक्तित्व का ज्ञान किया जाता है।
यह विधि उपचारात्मक अध्ययन में विशेष लाभदायक है।
विशेष
समस्या के कारण को जानना निदान कहलाता है जो कि मनोविज्ञान की सहायता से किया जाता है तथा कारण को दूर करना उपचार कहलाता है, जो कि शिक्षा की सहायता से किया जाता है।
बिना निदान के उपचार सम्भव नहीं है।
प्रश्नावली विधि
इस विधि के प्राचीन प्रवर्तक सुकरात शिक्षा में इस विधि के प्रवर्तकवुडवर्थ है।
मनोविज्ञान में इसके जन्मदाता स्टेनली हॉल है।
इसमें प्रश्नों के माध्यम से व्यक्तित्व का निर्धारण किया जाता है।
प्रश्नावली विधि चार प्रकार की होती है
(i) प्रतिबन्धित या सीमित प्रश्नावली (Close Question Year)
(ii) खुली या मुक्त प्रश्नावली
(iii) चित्रित प्रश्नावली
(iv) मिश्रित प्रश्नावली
वस्‍तुनिष्‍ठ विधियां
निरीक्षण विधि (बर्हिदर्शन विधि/सार्वभौमिक विधि)
इस विधि का प्रवर्तकजे.बी. वाटसन है।
इस विधि में सामने वाले व्यक्ति के व्यवहार का भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला जाता है कि विषयी (जिसका निरीक्षण किया जाता है) का व्यक्तित्व कैसा है।
यह दो प्रकार का होता है
          (अ) नियंत्रित/घोषित निरीक्षणइस निरीक्षण के अन्तर्गत व्यक्ति को पूर्व सूचना दी जाती है।
              (ब) अनियंत्रित/अघोषित निरीक्षणइस निरीक्षण में औचक (अचानक) निरीक्षण किया जाता है।
समाजमिति विधि
प्रवर्तकजे. एल. मोरेनो।
इस विधि में व्यक्ति की सामाजिकता के बारे में समाज के व्यक्तियों से जानकारी लेकर निष्कर्ष निकाला जाता है कि विषयी का व्यक्तित्व कैसा है।
जैसेबालकों से पूछा जाये कि वे किसी शैक्षिक यात्रा में अपना नेता किसे पसंद करेंगे। एक सोशियोग्राम तैयार किया जाता है, जिसके विश्लेषण से बालकों के व्यक्तित्व का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
कर्म निर्धारण मापनी
इसका सर्वप्रथम निर्माण थर्सटन ने किया।
इस परीक्षण में कर्म निर्धारण मापनी के माध्यम से आँकडे एकत्रित करके निष्कर्ष निकाला जाता है कि विषयी का व्यक्तित्व कैसा है।
शारीरिक परीक्षण
इस परीक्षण में व्यक्ति की शारीरिक जाँच करके निष्कर्ष निकाला जाता है कि निर्धारित नौकरी के लिए वह स्वस्थ है अथवा नही।

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